पढ़ने से मिल गई अब तो छुटटी
हो गई भैया हमारी गर्मी की छुटटी
अब हम बस धूम मचाएंगे
नाना नानी के गांव जाएंगे
रोज हमें सुनने मिलेगी कहानी
साथ नए पकवान खिलाएंगी नानी
कितना मजा आएगा,न होगा काम
पेड़ो पर चढ़ मामा संग तोड़ंगे आम
गाय बैलों संग नदी में तैरेंगे
घर में बछड़ो संग हम उछलेंगे
कभी घूमने जंगल को जायंगे
पपीहे के संग-संग हम गाएंगे
मोर को देख-देख नाचेंगे हम
बन्दर के पीछे-पीछे भागेंगे हम
thoughts && story
Sunday, 28 June 2015
गर्मी की छुट्टी
Thursday, 25 June 2015
करना है अगर साकार सपना
दृढ़ करलो जन-मन अपना
श्रम के साथ सब जुट जाओ
सोचा जो सब कुछ पाओ
काम करो तुम कुछ ऐसा
हो भला पुरे देश का
पढ़ने से न तुम जी चुराना
बढ़ने का हैं ये तरीका पुराना
बड़े बुजुर्ग यही कहते हैं
श्रम से ही आगे बढ़ते है
आगे बढ़ने का मिल गया मन्त्र
बन जाना कुछ तुम
करेगी दुनिया नाज
सबके मीत-पेड़
1
बातों से कुछ होगा नहीं,
अरे कुछ करके दिखाओ |
प्रदूषण की बातें कम करो,
अरे एक पेड़ लगाओ |
जब तक न सम्भले उसे सहेजो,
लगाकर उसे भूल न जाओ |
श्रम से सींचो उसको,
प्रेम से उसे गले लगाओ|
बड़ा हो जायेगा तब फल देगा,
औरो के संग आप भी खाओ||
2
अश्वमेघ यज्ञ से बढ़कर है,
एक पेड़ लगाना |
सबसे ओछा काम है भैया,
हरे पेड़ गिराना |
मुक्ति प्रदूषण से पानी है,
तो हम ये कसम खाए |
जहाँ कही दिखे जगह,
हम एक पेड़ लगाएं ||